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Nov 9, 2019

#AyodhyaVerdict: मंदिर वहीं बनेगा और मस्जिद भी बनेगी, पढ़िए अयोध्या मामले पर फैसले की बड़ी बातें. #RamMandir

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Image Credit: Indianrailinfo

देश के सबसे विवादित और सबसे पुराने केस में से एक अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने 09 अक्टूबर 2019 को आखिरकार अपना फैसला सुना दिया है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में संवैधानिक पीठ ने निर्मोही अखाडा एवं शिया वखव बोर्ड का दावा भी खारिज कर दिया। वहाँ पर भगवन राम का हक़ माना गया है इसके साथ ही मुस्लिम पक्ष को अलग से 5 एकड़ जमीन देने का भी आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को ट्रस्ट बनाने का आदेश भी दिया है.
क्या रही फैसले की बड़ी बातें 
  • अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, मंदिर बनने का रास्ता साफ़ 
  • विवादित ज़मीन पर माना गया भगवान राम का हक़ 
  • आस्था और विश्वास पर नहीं कानून के आधार पर दिया फैसला 
  • मुस्लिम पक्ष को ज़मीन देने की जिम्मेदारी योगी सरकार को दी गई 
  • 3 माह में केंद्र सरकार करेगी मंदिर ट्रस्ट का गठन 


  • राम मंदिर की रूप रेखा तैयार करेगा नया ट्रस्ट 
  • सुन्नी वक्फ को मिलेगी 5 एकड़ वैकल्पिक ज़मीन 
  • निर्मोही अखाड़ा और शिया वक्फ बोर्ड दावा ख़ारिज 
  • पक्षकार गोपाल विशारद को मिला पूजा-पाठ का अधिकार 
  • मुस्लिम पक्ष को ज़मीन  देने की ज़िम्मेदारी योगी सरकार की 
फैसला सुनाते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि दस्तावेजों से पता चलता है कि 1885 से पहले हिन्दू अंदर पूजा करने की बजाय  रामचबूतरा  सीता रसोई में पूजा करते थे. सन 1934 के दंगो के बाद से मुसलमानो का अधिकार आंतरिक अहाते में नहीं रह गया. इसके बाद से ही मुसलमान अपना एकाधिकार सिद्ध नहीं कर पाए जबकि हिन्दू निर्विवाद रूप से बाहर ही पूजा करते रहे. 6 दिसंबर 1992 को मस्जिद का ढांचा ढहा दिया गया जबकि रेलिंग 1886 में लगाईं गई थी.
इस संवैधानिक पीठ ने सुनाया फैसला 
अयोध्या विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने फैसला सुनाया। इस पीठ में सुप्रीम कोर्ट के 4 न्यायाधीश और 1 मुख्य न्यायाधीश शामिल थे. इस संवैधानिक पीठ में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई , जस्टिस अब्दुल नज़ीर ,जस्टिस अशोक भूषण , जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ , एस ए बोबडे शामिल थे।  संवैधानिक पीठ की अध्यक्षता चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने की।  श्री रंजन चाहते थे कि उनके रिटायर होने पहले अयोध्या मामले पर फैसला सुनाया जाए।