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Nov 9, 2019

#AyodhyaVerdict: सुप्रीम कोर्ट के वे 5 जज जिन्होंने विवादित मामले पर फैसला सुनाया। #RamMandir #SupremeCourt #ChiefJustice

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Image Source: Dainik Bhaskar

अयोध्या फैसला. सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संविधान पीठ ने लम्बे इंतज़ार के बाद विवादित माले पर 09 नवंबर 2019 को आख़िरकार अपना फैला सुना ही दिया। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में 5 जजों की एक बेंच गठित की गई थी इस बेंच में जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस अशोक भूषण , जस्टिस डीवाय चंद्रचूड जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर शामिल थे। इस फैसले के पहले केंद्र सरकार ने सभी 5 जजों की सुरक्षा बढ़ाई।

फैसला आने के पहले केंद्र सरकार ने चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया (CJI) को जेड प्लस सुरक्षा प्रदान की, साथ ही बाकी चारो जजों की सुरक्षा बढ़ाई। सभी 5 जजों के घरों की भी सुरक्षा केंद्र सरकार के द्वारा बढ़ाई गई. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के बाहर भी भरी मात्रा में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए.
फैसले के पहले पांचो जजों ने ४० दिनों तक अयोध्या मामले की सुनवाई की 
आइये हम जानते है पांचो जजों का कार्यानुभव के बारे में।

Supreme Court of India Chief Justice Ranjan Gogoi
CJI Ranjan Gogoi [Image Source : The Hindu]
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई असम के  रहने वाले है और पूर्वोत्तर राज्यों से सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस बनने वाले पहले व्यक्ति है. कानून की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने 1978 में बार में पंजीयन कराया। इसके बाद उन्होंने गुवाहाटी कोर्ट में प्रैक्टिस की और सन 2001 में स्थाई तौर पर जज नियुक्त किए गए।

इसके बाद यह से उनका ट्रांसफर पंजाब - हरियाणा की कोर्ट में हुआ. यहां पर रंजन गोगोई 2001 में चीफ जस्टिस बने. सन 2012 में  इनकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट में बतौर जज हुई और अक्टूबर सन 2018 में  वे सुप्रीम कोर्ट में चीफ बनें।  इन्होने पहले ही कह दिया था कि रिटायर होने के पहले वे अयोध्या मामले में अपना फैसला सुनना चाहते है. और आख़िरकार 9 नवंबर 2019 को उन्होंने अपना फैसला सुनाया.



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Justice S A Nazeer [Image Source: Wikipedia]

जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर 
जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर ने सन 1983 में कर्नाटक की हाई कोर्ट में अपनी वकालात शुरू की 20 साल के लम्बे अनुभव के बाद 2003 में उन्हें कर्नाटक हाईकोर्ट में बतौर एडिशनल जज नियुक्त किया गया. और अगले ही वर्ष यानी सन 2004 में उन्हें स्थायी जज के तौर पर नियुक्त किया गया. अगस्त 2017 में वे सुप्रीम  में बतौर नियुक्त किया गया.

आपको याद होगा कि सन 2017 में जब तीन तलाक का मामला चल रहा था उस समय, तब के चीफ जस्टिस जेएस खेहर के साथ मिलकर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट किसी भी धर्म के निजी कानूनी मामलो मे हस्तक्षेप नहीं कर सकती है. हालांकि बाद में केंद्र सरकार ने यह बिल पास करवाकर तीन तलाक कानून  को बैन कर दिया था.

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Justice Ashok Bhushan [Image Source: Wikipedia]



जस्टिस अशोक भूषण 
सन 1979 में आपने इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकील के तौर पर प्रैक्टिस की शुरुआत की।  22 साल तक लगातार वकालत करने के बाद 2001 में आपको इलाहबाद हाईकोर्ट में जज के तौर पर नियुक्त किया गया. इसके बाद सन 2014 में आपको केरल हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया. यहां पर इन्होने काफी समय तक एक कार्यवाहक चीफ जस्टिस के रूप में भूमिका निभाई। इसके बाद मार्च 2015 में आपको केरल हाईकोर्ट में ही स्थाई जज के तौर पर नियुक्ति दे दी गई. सुप्रीम कोर्ट में इनकी नियुक्ति मई 2016 में की गई.






Justice DY Chandrachud [Image Source: Wikipedia]

जस्टिस डीवाय चंद्रचुड़
जस्टिस दिवाय चंद्रचूड़ मई सन 2016 में सुप्रीम कोर्ट में जज के तौर पर नियुक्त किए गए. इनके पिता  वाईवी चंद्रचूड़ भारत के सबसे लम्बे समय तक चीफ जस्टिस रह चुके है.  डी वाय चंद्रचूड़ का पूरा नाम धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ है. सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति से पहले आप इलाहबाद में चीफ जस्टिस रह चुके है. मार्च 2000 में आप मुंबई हाईकोर्ट में जज के तौर पर नियुक्त किए गए थे. आपने काफी समय तक महाराष्ट्र ज्यूडिशियल अकादमी में निदेशक की भूमिका निभाई। आपने अयोध्या जैसे राष्ट्रस्तरीय विवादित मामले में हिन्दू एवं मुस्लिम दोनों पक्षों की भावनाओं की क़ानूनी पक्ष की बारीकी से जांच की है. आपने देश के कई अहम मामलो में फैसला सुनाया है जैसे - व्यभिचारी और निजता का अधिकार जैसे महत्वपूर्ण मामले आपने बड़े ही सहजता पूर्वक सुलझाए।








Justice SA Bobde [Image Source: News18]


जस्टिस शरद अरविन्द बोबडे
जस्टिस शरद अरविन्द बोबडे का जन्म महाराष्ट्र में हुआ। आपने मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर बैंच में कानून की प्रैक्टिस की. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने सीजेआई पद के लिए जस्टिस शरद अरविन्द का नाम प्रस्तावित किया था. सन 2000 में आपने मुंबई हाईकोर्ट में एडिशनल जज की भूमिका निभाना शुरू की. और इसके 2 वर्ष बाद आपका ट्रांसफर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट  में हो गया. इसके बाद सन 2012 में  मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला। इसके ठीक 1 साल बाद यानी अप्रैल 2013 में आपकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट में हुई। सीजेआई गोगोई के खिलाफ योन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए बनी समिति में भी आप शामिल थे.

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