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Hindu Muslim Love Biggest Example Mohammad Khurram.

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मुसलमान होते हुए भी पहले मंदिर जाते है मोहम्मद खुर्रम

जी हाँ आपने सही पढ़ा | सुबह सुबह उठकर मंदिर में जाकर श्रद्धालुओं को पानी पिलाना , इसके बाद मज्जिद में जाकर साफ-सफाई करना , और इसके बाद गुरुद्वारे में जाकर लंगर में लोगो को खाना किलाना | इसके बाद ही रत का खाना खाकर सोना यही दिनचर्या है मोहम्मद खुर्रम की | 45 वर्षीय खुर्रम की यह रोज की दिनचर्या है जो की सभी धर्मो को सामान भाव से देखना, यह लोगो के लिए मिसाल बन चूका है | 
खुर्रम का परिवार भी उनकी सभी धर्मो के प्रति आस्था में सहयोग करता है | वह भक्तो को लंगर , पानी पिलाने और तो और मंदिरों , गुरुद्वारों में होने वाले त्योहारों में भी वे बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते है और यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को एकता का परिचय देते है |
खुर्रम बताते है कि वे बचपन से बटवारे की बात सुनते आये है , कभी घर में बटवारा , कभी स्कूल में बटवारा , कभी धर्म में बटवारा, | इस बात को लेकर वे काफी पाक चुके थे | तभी से उन्होंने फैसला किया कि वे अब लोगो को बटवारे की बजाय जोड़ने का काम करेंगे और तभी से मंदिरों और गुरूद्वारे में जाकर अलग अलग धर्मो के लोगो से जुड़ने का कम शुरू किया | मंदिरों की रोनक देखकर अपने पिताजी के साथ हिन्दुओं के त्योहारों में शामिल होना शुरू किया |


खुर्रम भी रखते है व्रत -

  जी हाँ , खुर्रम जितना रोज़े में विश्वास रखते है उतना ही विश्वास वो व्रत करने में भी रखते है और व्रत रखते भी है | गुरूद्वारे से चलने वाली सेवा रथ यात्रा में भी खुर्रम झाड़ू लगाकर यात्रा को पूरी करते है | लंगर के समय भी सुबह खाना बनाने से लेकर खाना परोसने तक और तो और बर्तन साफ करके ही सोते है |

दोस्तों यह खबर Navbharat Times की Website से ली गई है |

वहीँ इंदिरापुरम गुरुद्वारा कमिटी के मेम्बर हरदेव सिंह जी बताते है की खुर्रम रोजाना गुरूद्वारे आते है और पूरा काम करके ही वापस जाते है | और गुरुद्वारे के लोग भी ईद के दिन खुर्रम के घर जाकर त्यौहार का आनंद लेते है |

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