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Nov 13, 2019

November 13, 2019

#WrongAadharNumber : अब गलत आधार नंबर देने पर लगेगा 10,000/- रु का जुर्माना #Aadhar

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जैसा कि हम जानते है आजकल लगभग हर सरकारी या प्रायवेट विभाग में कोई भी काम होता है तो वो आधार के बिना नहीं होता है. हर जगह हमसे हमारा आधार कार्ड माँगा जाता है. लेकिन हम आपको यहां पर बताने वाले है कि कुछ ऐसी जगह भी है जहां पर अब यदि आपने गलत आधार कार्ड नंबर दिया तो फिर आपको 10,000 रु जुर्माना देना होगा। इस पोस्ट में हम यही जानेंगे की कब और किसने यह नियम लागू किया और वो कौन सी जगह है जहां पर आधार की गलत जानकारी देने पर हमें जुर्माना देना होगा।

हाल ही में आयकर विभाग ने पैन कार्ड की जगह आधार कार्ड के इस्तेमाल को मंजूरी दी है।  ऐसा इसलिए क्यूंकि आज भी देश में ऐसे लाखों लोग है जिनके पास अभी तक पैन कार्ड नहीं बन पाया है लेकिन उनके पास आधार कार्ड है. और वो लोग पैन कार्ड नहीं होने के चक्कर में आयकर रिटर्न फाइल नहीं लार पा रहे है। ऐसे में आयकर विभाग ने लोगो को राहत दी है कि आप अपने पैन कार्ड की जगह आधार कार्ड का इस्तेमाल कर सकते है. 

लेकिन क्या आप जानते है की आधार की गलत जानकारी देने पर आपको 10,000/- रु का जुर्माना भी भरना पड़ सकता है. यहाँ आपको उन जगहों के नाम बता रहे है जहां पर आधार की गलत जानकारी देने पर जुरमाना लगेगा।
इन जगहों पर लागू होगा यह नियम 
इनकम टैक्स एक्ट 1961 में किये गए संशोधन के अनुसार आप पैन कार्ड की जगह आधार कार्ड का इस्तेमाल कर सकते है लेकिन यदि आपने गलत आधार कार्ड नंबर तो आपको 10,000/- रु की पेनल्टी देनी होगी। इस संशोधन में जुर्माने का प्रावधान रखा गया है. लेकिन यह जुर्माना आपको सिर्फ उन्ही जगहों पर देना होगा जहां पर पैन कार्ड की जगह आधार कार्ड को मान्य किया गया है. 

कहाँ पर पैन कार्ड की जगह आधार कार्ड दे सकते है 
नए नियमो के मुताबिक़ आपको जब बैंक में खाता खुलवाना हो, इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना हो, 50,000/- रु से अधिक का बांड हो, या म्यूच्यूअल फंड्स खरीने पर आप पैन कार्ड की जगह आधार कार्ड का इस्तेमाल कर सकते है। और पैन कार्ड की जगह आधार देते हुए आपने गलत जानकारी दी तो  आपको यह जुर्माना देना होगा। 
जुर्माने किस स्थिति में लगेगा 

  • किसी ट्रांसक्शन पर पैन कार्ड और आधार कार्ड दोनों की जानकारी नहीं देने पर 
  • पैन कार्ड की जगह गलत आधार नंबर देने पर 
  • आधार कार्ड के साथ बायोमेट्रिक आइडेंटिफिकेशन नहीं देने पर या आइडेंटिफिकेशन फेल हो जाने पर भी आपको जुरमाना देना होगा 

Nov 12, 2019

November 12, 2019

#NewPolicy: सावधान, अब कभी भी बंद हो सकता है आपका YouTube Account

YouTube की नई Policy आ चुकी है और इस नई Policy के अनुसार आपका YouTube Channel कभी भी बंद हो सकता है. यदि आप एक YouTuber है तो यह Post आपके लिए बहुत ही खास एवं महत्वपूर्ण हो जाती है।  यदि आप एक YouTuber है या YouTube पर अपना नया चैनल बनाने की प्लानिंग कर रहे है तो आपको यही पोस्ट ध्यान पूर्वक पढ़नी चाहिए।
जैसा कि हम जानते है YouTube, Google की एक Streaming Site है।  YouTube ने हालही में अपनी पालिसी में एक बहुत ही बड़ा बदलाव किया है. और यह बड़ा बदलाव YouTubers के लिए मुसीबत बन सकता है. YouTube  ने अपनी नई शर्त में कहा है कि यदि YouTube को आपके चैनल से कोई फायदा नहीं हो रहा है तो आपका चैनल या तो बैन कर दिया जाएगा या फिर डिलीट कर दिया जाएगा। आइये विस्तार से जानते है क्या है YouTube की नई पॉलिसी और यह पॉलिसी कब से लागू होगी।


YouTube का अपनी नई पॉलिसी में कहना है कि यदि आपका चैनल अभी तक मोनेटाइज नहीं हुआ है और आप पैसा नहीं कमा रहे है तो आपका चैनल कभी भी YouTube की और से बंद किया जा सकता है।  क्युकी यदि एक YouTuber जब पैसा कमाएगा तभी तो YouTube को भी फायदा होगा।  YouTube ने अपनी नई Policy में कहा है कि यदि किसी YouTuber को लगता है कि उसका चैनल अभी तक मोनेटाइज नहीं हुआ है और चैनल कभी भी बंद या डिलीट हो सकता है तो ऐसे में YouTuber अपना सारा Data Download करके अपने पास रख सकता है .
Image Source:YouTube
इस बात की जानकारी YouTube ने पहले ही सारे YouTubers को एक Email के जरिए दे दी है. हालांकि चैनल डिलीट करने के पहले आपको नोटिफाई किया जाएगा उसके बाद ही आपका चैनल डिलीट होगा। इस पॉलिसी के बाद यूट्यूब को आपका चैनल डिलीट करने का अधिकार मिल गया है. हालांकि इस पॉलिसी से सबसे बड़ी समस्या उन लोगो को होगी जो YouTube पर शानदार वीडियो बनाते है लेकिन अभी तक उनका Channel Monetize नहीं हुआ है.
यदि आपका चैनल भी अभी तक मोनेटाइज नहीं हुआ है तो कोशिश कीजिये कि चैनल जितना जल्दी हो सके मोनेटाइज हो जाए। हालांकि YouTube की यह Policy 10 दिसंबर से लागू होगी।  आपको YouTube की यह Policy कैसी लगी कृपया कमेंट करके जरूर बताएँ।

Nov 10, 2019

November 10, 2019

Ayodhya_Verdict: पांच सदी पुराना है अयोध्या मामला, जानिये कब क्या-क्या हुआ. #Ram_Mandir #Babri_Masjid

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क्या आप जानते है अयोध्या का मामला 5 सदी पुराना है. यह मामला तब का है जब से माना जाता है कि बाबर ने मंदिर तुड़वाकर मस्जिद का निर्माण करवाया था।  हमारे देश की आज़ादी के बाद से ही इस मामले ने देश की राजनीती को काफी प्रभावित किया है. अयोध्या मामले के कारण अभी तक देश में काफी दंगे हुए , हिंसा हुई , लोग मारे गए, जांच के लिए जांच आयोग की टीम गठित हुई , लोगो को आरोपी भी बनाया गया , और अब आखिरकार 9 नवम्बर 2019 को देश की सर्वोच्च अदालत में इस मामले पर फैसला सुना दिया गया और विवाद को ख़त्म कर दिया गया.

आज हम इस पोस्ट में आपको बताएँगे कि पांच सदी पुराने इस मामले में कब क्या हुआ .

बाबर ने मंदिर ने तुड़वाकर मस्जिद बनवाई 
कहा जाता है कि सन 1528-29 में बाबर ने विवादित स्थान पर मंदिर तुड़वाकर मस्जिद बनवा दी। इस स्थान पर हिन्दू अपने आराध्य देवता भगवन श्री राम का जन्म स्थान मानते है। ऐसे कहा जाता है कि मुगल राजा बाबर के सेनापति मीर बाकी ने यहां मंदिर तुड़वाकर मस्जिद बनवाई थी जिसे बाबरी मस्जिद नाम दिया गया। बाबर 1526 में भारत आया था और 1528 तक उसका साम्राज्य अवध जिसे अब अयोध्या के नाम से जाना जाता है, तक पहुंच गया। इसके बाद तीन सदियों का इतिहास किसी भी ओपन सोर्स पर उपलब्ध नहीं है।

अयोध्या में जब पहली बार दंगे हुए थे 
ऐसा कहा जाता है कि हिन्दू और मुस्लिम समुदाय के बीच पहली बार 1853 में हिंसक घटना हुई थी। उस समय निर्मोही अखाड़े ने दावा करते हुए यह बात कही कि "जहाँ पर अभी मस्जिद है वहाँ पहले मंदिर हुआ करता था, जिसे बाबर के शासनकाल में गिरा दिया गया था ". और इसी मुद्दे को लेकर अवध में अगले 2 सालो तक भयानक हिंसक घटनाएं होती रही. जबकि फैजाबाद जिला गजट 1905 के अनुसार सन 1855 तक हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही इस इमारत में पूजा व इबादत करते रहे।

अंग्रेजो ने इस जगह को 2 भागो में बाँट दिया 
जैसा कि हम जानते है सन 1857 में आज़ादी के लिए पहला आंदोल हुआ जिसे हम प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के नाम से भी जानते है. 1857 में इस आंदोलन के कारण यह मामला थोड़ा शांत हो गया था।  और इसके बाद सन 1859 में अंग्रेजो ने इस मस्जिद के आगे एक दीवार बनवा दी जिससे यह परिसर 2 भागों में विभाजित हो गया।  बाहर हिन्दूओ को पूजा-प्रार्थना करने की जबकि अंदर मुसलमानो को इबादत करने की अनुमति दी गई।


जिला अदालत में पहुंचा यह विवादित मामला 
अब मंदिर-मस्जिद का यह विवादित मामला इतना गंभीर हो गया था कि सन 1885 में यह मामला पहली बार कोर्ट में  पंहुचा। साधू-महंत रघुवर दास ने फैज़ाबाद कोर्ट में याचिका दाखिल की और बाबरी मस्जिद की जगह मंदिर बनाने की अनुमति मांगी। हालांकि बाद में कोर्ट ने यह अपील ठुकरा दी और इसके बाद तारीख पर तारीख मिलने लगी और सिलसिलेवार यह क्रम चलते गया।
दंगो में क्षतिग्रस्त हुई थी मस्जिद की दीवार और गुम्बद
जैसे-जैसे तारीखों का क्रम आगे बढ़ता गया वैसे-वैसे यह विवाद और भी गहराता गया. सन 1934 में फिर दंगे हुए और इस बार मस्जिद के चारो तरफ की दीवार और गुम्बद को नुकसान हुआ।  इसके बाद अंग्रेजो ने अर्थात ब्रिटिश सरकार ने इस क्षतिग्रस्त हिस्से का पुनर्निर्माण करवा दिया।

सरकार ने इस स्थल पर लगवा दिया ताला 
भगवान राम की मूर्तियां मस्जिद में पाई गई।  कहा जाता है कि ये मूर्तियां हिन्दुओं ने मस्जिद में रखवाई। ऐसे में दोनों पक्षों में भयानक विवाद व हिंसा हुई।  मुसलमानो ने यहां पर नमाज़ पढ़ना बंद कर दिया। अब्द दोनों पक्षों की ओर से अदालत में याचिका दायर की गयी। सन 1949 में इस स्थल को विवादित मानकर तात्कालीन सरकार ने इस स्थान पर ताला लगवा दिया।

जब भगवान राम की पूजा की इज़ाज़त मांगी गई 
गोपाल सिंह विशारद ने 1950 में भगवान राम की पूजा करने के लिए फैज़ाबाद कोर्ट से इज़ाज़त मांगी। महंत रामचंद्र दास ने मस्जिद में भगवान राम की पूजा जारी रखने के लिए याचिका दायर की। और इसी दौरान मस्जिद को ढांचा के रूप में सम्बोधित किया गया।

जब दोनों पक्षों ने विवादित स्थल के हक के लिए याचिका दायर की
सन 1959 से 1961  के बीच दोनों पक्षों ने विवादित स्थल पर अपने मालिकाना हक़ के लिए याचिका दायर की।  निर्मोही अखाड़े ने इस स्थल को हिन्दुओं का हक़ मानते हुए याचिका दायर की जबकि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बाबरी मस्जिद पर मालिकाना हक़ के लिए मुकदमा दायर किया।

राम जन्मभूमि मुक्ति के लिए समिति का गठन हुआ 
हिन्दुओं ने विश्व हिन्दू परिषद के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया ताकि राम जन्मभूमि को मुक्त कराया जा सके। इसके साथ ही गोरखपुर के गोरखनाथ धाम के महंत अवैध्य नाथ ने राम जन्मभूमि यज्ञ समिति बनाई ताकि राम जन्मभूमि को शीघ्रातिशीघ्र मुक्त कराया जा सके। महंत अवैध्य नाथ ने हिन्दुओ से अपील की कि उसी पार्टी को वोट दें जो हिन्दुओ के पवित्र स्थानों को मुक्त कराए। बाद में इस अभियान का नेतृत्व भारतीय जनता पार्टी के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने संभाल लिया।


ताला खोलने का आदेश जारी हुआ और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी बनाई गई 
इसप्रकार यह मामला दिन पर दिन गंभीर होता गया दोनों पक्ष अपने हक़ के लिए लड़ाई लड़ने लगे। कभी हिन्दू पक्ष तो कभी मुस्लिम पक्ष इस विवादित स्थान को अपना मालिकाना हक़ बताता।  ऐसे में यह मामला कोर्ट में कई सालों से चलता रहा। 1986 में जिला कोर्ट ने आदेश दिया की विवादित स्थल पर लगा ताला खोला जाए और पूजा-प्रार्थना के लिए हिन्दुओ को इज़ाज़त दी जाए।  ऐसे में मुस्लिम पक्ष नाराज़ हो गया और इसके बाद मुस्लिम पक्ष ने बाबरी मस्जिद संघर्ष समिति का गठन किया।
विश्व हिन्दू परिषद ने राम मंदिर का शिलान्यास किया 
अयोध्या के राम मंदिर मामले में भारतीय जनता पार्टी ने विश्व हिन्दू परिषद को अपना समर्थन दिया। विश्व हिन्दू परिषद के नेता देवकी नंदन अग्रवाल ने रामलला की तरफ से मंदिर के हक़ के लिए कोर्ट में याचिका दायर की। साथ ही सन 1989 में विश्व हिन्दू परिषद ने मस्जिद से कुछ ही दुरी पर राम मंदिर का शिलान्यास किया।

जब लालकृष्ण आडवाणी गिरफ्तार हुए 
1990 में भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने हिन्दुओं को इस महत्वपूर्ण मुद्दे से अवगत कराने के लिए गुजरात के सोमनाथ से लेकर उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक रथ यात्रा की शुरआत की।  इस दौरान हज़ारों कार सेवक अयोध्या में एकत्रित हुए। फलस्वरूप गुजरात , कर्नाटक , आँध्रप्रदेश व उत्तरप्रदेश में दंगे भड़कना शुरू हो गए थे. स्थिति को देखते हुए लालू प्रसाद यादव ने बिहार में लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा रुकवाकर उनको गिरफ्तार करवा लिया। ऐसे में देश के कई हिस्सों से हिन्दुओं द्वारा मंदिर निर्माण के लिए लाखों ईटें अयोध्या पहुंचाई गई। आडवाणी की गिरफ्तारी के दौरान देश में प्रधानमंत्री वीपी सिंह की सरकार थी।  इसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने वीपी सिंह सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया।

जब पहली बार अयोध्या में हुआ था गोलीकांड 
1990 में पहली बार अयोध्या में कारसेवा हुई। 30 अक्टूबर 1990 को कारसेवको ने मस्जिद पर चढ़कर झंडा फहराया था।  इस समय उत्तर प्रदेश में  मुलायम सिंह यादव की सरकार थी। मुलायम सिंह यादव की सरकार नें कारसेवको पर गोली चलाने का आदेश दे दिया। गोली चलने से 5 कार सेवको की मौत हो गई। कार सेवको की मौत के बाद मामला और भी गंभीर हो गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री ने इस मामले को सुलझाने का काफी प्रयास किया किन्तु सफलता नहीं मिल पाई।


उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी 
1990 में हुए गोलीकांड के बाद जब 1991 में उत्तर प्रदेश में चुनाव हुए तब मुलायम सिंह यादव की सरकार हार गई और भारतीय जनता पार्टी को इस चुनाव में शानदार जीत मिली। और भाजपा ने अपनी सरकार बना ली।

जब बाबरी मस्जिद ढहा दी गई और देश में दंगे शुरू हुए 
30-31 अक्टूबर 1992 को धर्मसंसद में कारसेवा की घोषणा की गई। इस दौरान उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री कल्याणसिंघ ने मस्जिद की हिफाज़त के लिए कोर्ट में हलफनामा दिया। देश भर भयानक दंगे होने लगे। देशभर से हज़ारो कार सेवक अयोध्या पहुंचे और 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद को तोड़कर एक अस्थाई राम मंदिर का निर्माण किया गया. पुरे देश में दंगे इस कदर भड़क गए कि 2000 से अधिक लोगो की मौत हो गई। इसके बाद 16 दिसंबर 1992 को मस्जिद ढहाने की जांच के लिए लिब्रहान आयोग का गठन हुआ। जज एमएस लिब्रहान की अध्यक्षता में जांच शुरू की गई।  और 1994 में बाबरी मस्जिद विंध्वंस का केस इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में शुरू हुआ।


मस्जिद ढहाने वाले 49 लोगो को दोषी बनाया गया 
 बाबरी मस्जिद विध्वंस केस की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने सितम्बर 1997 में 49 लोगो को दोषी ठहराया गया।  इन 49 दोषियों में भारतीय जनता पार्टी के कुछ बड़े नेताओ के भी नाम थे। बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी पर तनाव और अधिक बढ़ गया।  और सन 2001 में विश्व हिन्दू परिषद ने राम मंदिर बनाने की तारीख की घोषणा तक कर डाली। विश्व हिन्दू परिषद ने कहा की मार्च 2002 में राम मंदिर का निर्माण किया जाएगा।

जनवरी-फरवरी 2002: मामला सुलझाने के लिए वाजपेयी ने हस्तक्षेप किया 
वाजपेयी सरकार ने अयोध्या मामले को सुलझाने के लिए एक समिति का गठन किया।  एक वरिष्ठ अधिकारी जिनका नाम शत्रुघ्न सिंह था उनको हिन्दू और मुस्लिम पक्ष के नेताओं से बातचीत कर मामले को सुलझाने के लिए नियुक्त किया गया। इस दौरान उत्तरप्रदेश में विधानसभा चुनाव आ गए।  भारतीय जनता पार्टी ने राम मंदिर को अपने चुनावी घोषणापत्र में शामिल करने से साफ़ इनकार कर दिया। 15 मार्च 2002 से विश्व हिन्दू परिषद ने मंदिर निर्माण का कार्य शुरू करने की घोषणा कर दी।  सैकड़ो हिन्दू कार्यकर्ता इस दौरान अयोध्या पहुंच गए।  लेकिन फरवरी 2002 में जब कई सारे कार्यकर्ता जिस ट्रैन से लौट रहे थे, गोधरा पहुंचते ही उस ट्रैन में आग लगा दी गई। इसमें 58 हिन्दू कार्यकर्ताओं की मौत हो गई।

13 मार्च 2002 को सुप्रीम कोर्ट का आया आदेश 
अब स्थिति काफी बेकाबू हो चुकी थी। स्थिति को देखते हुए  13 मार्च 2002 को सुप्रीम  कोर्ट का आदेश आया कि अयोध्या में इस वक्त जैसी भी स्थिति है उसे वैसा ही रखा जाए।  किसी भी पक्ष को सरकार द्वारा अधिग्रहित जमीन पर शिला पूजन की अनुमति नहीं होगी। सरकार ने कहा कोर्ट का जो भी फैसला आएगा उसका पालन किया जावेगा।

15 मार्च 2002 : सरकार को सौपी गई शिलाएं 
इस दौरान केंद्र सरकार और विश्व हिन्दू परिषद के बीच एक समझौता हुआ. इस समझौते में यह निर्णय लिया गया कि विश्व हिन्दू परिषद मंदिर परिसर से बाहर सरकार को शिलाएं सौपेगी। राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत परमहंस रामचंद्र दास एवं विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक सिंघल की अगुवाई में 800 कार्यकर्ताओं ने सरकारी अधिकारी को शिलाएं सौपी। अप्रैल 2002 में हाईकोर्ट में तीन जजों की पीठ ने अयोध्या में विवादित स्थान के मालिकाना हक़ को लेकर सुनवाई प्रारम्भ की।

विवादित स्थान के नीचे खुदाई शुरू हुई 
मार्च 2003 से लेकर अगस्त 2003 तक विवादित स्थान के नीचे पुरातत्व विभाग ने खुदाई  की। खुदाई के दौरान मस्जिद के नीचे से मंदिर से मिलते-जुलते अवशेष होने के प्रमाण मिले। इसके बाद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मांगी की हिन्दुओं को विवादित स्थल पर पूजा-पाठ करने की अनुमति दी जाए।  लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका क्युकी कोर्ट ने  केंद्र सरकार की यह बात नहीं मानी। मई 2003 को, बाबरी मस्जिद गिराए जाने के आरोप में सीबीआई ने उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी समेत 8 लोगो को के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किये। इस दौरान कांची पीठ के शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती ने जून 2003 में मामला सुलझाने का प्रयास भी किया उन्होंने कहा कि एक माह के अंदर इस विवादित मामले को सुलझा लिया जाएगा लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हो पाया।

विश्व हिन्दू परिषद ने सरकार से अपील की कि  राम मंदिर बनाने के लिए विशेष विधेयक लाया जाए लेकिन तात्कालीन उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने अगस्त 2003 में विश्व हिन्दू परिषद की यह अपील ठुकरा दी और कहा कि इस प्रकार का कोई विधेयक नहीं लाया जाएगा।

2004 :लालकृष्ण आडवाणी ने अस्थाई राम मंदिर में पूजा की 
जुलाई-अगस्त 2004 में लालकृष्ण आडवाणी ने अस्थाई तौर पर बनाए गए मंदिर में पूजा अर्चना की और कहा कि राम मंदिर का निर्माण जरूर किया जाएगा।  इस दौरान जुलाई में ही शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने सुझाव दिया था कि ये जो विवादित स्थान है यहां पर मंगल पांडे के नाम पर कोई राष्ट्रिय स्मारक बना दिया जाए।

जनवरी - जुलाई 2005 : जब हुआ अयोध्या में आतंकी हमला 
6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिराए जाने की कथित भूमिका के मामले में लालकृष्ण आडवाणी को 2005 में अदालत में तालब किया गया।  2005 में ही अयोध्या में आतंकी हमला भी हुआ। 5 आतंकियों ने मिलकर इस हमले को अंजाम दिया था. वैसे पांचो आतंकियों सहित 6 लोग इस हमले में मारे गए। अगली बार फिर से लालकृष्ण आडवाणी को कोर्ट में [28 जुलाई 2005 को रायबरेली की एक अदालत में] पेश होने को कहा गया।  क्युकी उन पर बाबरी मस्जिद गिराने के दौरान भड़काऊ भाषण देने का आरोप था।  बाद में कोर्ट ने उन पर आरोप तय भी किये। 4 अगस्त 2005 को 4 लोगो को न्यायिक हिरासत में भेजा गया।

बाबरी मस्जिद को ढहाना एक मिलीभगत थी 
20 अप्रैल 2006 को कांग्रेस की सरकार ने लिब्रहान आयोग से कहा कि बाबरी मस्जिद को एक सुनियोजित तरीके से एक प्लानिंग के तहत ढहाया गया। कांग्रेस सरकार ने कहा कि बाबरी मस्जिद को ढहाने में भाजपा , शिवसेना , बजरंग दल एवं आरएसएस इन सभी की मिलीभगत थी। इन सभी ने मिलकर ही बाबरी मस्जिद को एक सुनियोजित तरीके से ढहाया है।

बुलेटप्रूफ कांच का घेरा बनाने का प्रस्ताव 
2006 में कांग्रेस सरकार ने विवादित स्थल पर बने अस्थाई मंदिर के चारो ओर बुलेटप्रूफ कांच का घेरा बनाने के लिए कोर्ट में प्रस्ताव रखा ताकि विवाद और आगे न बढे।  इस प्रस्ताव का मुस्लिम पक्ष ने पुरजोर विरोध किया और मुस्लिम पक्ष ने कहा कि कोर्ट ने पहले ही विवादित स्थल को यथास्थिति रखने का आदेश दिया हुआ है अतः बुलेट प्रूफ कांच का घेरा नहीं बनाने दिया जावे।

नेहरू -गाँधी परिवार का प्रधानमंत्री होता तो मस्जिद नहीं गिरती 
19 मार्च 2007 को राहुल गाँधी ने चुनावी केम्पेन के दौरान अपने भाषण में यह कह दिया कि यदि नेहरू या गाँधी परिवार का प्रधानमंत्री होता तो बाबरी मस्जिद नहीं गिरती।  राहुल गाँधी के इस बयान के बाद देश की राजनीति काफी गरमा गई थी।  उनके इस बयान पर कई राजनैतिक दलों ने तीखी प्रतिक्रियाएं दी थी.
लिब्रहान आयोग ने जांच रिपोर्ट प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौपी
बाबरी मस्जिद विध्वंस केस की जांच के लिए गठित की गई लिब्रहान आयोग ने 17 वर्षो बाद 2009 में अपनी जांच रिपोर्ट तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह को सौपीं।  इसी वर्ष 7 जुलाई को उत्तरप्रदेश सरकार ने भी यह माना कि अयोध्या मामले से जुडी 23 फाइलें सचिवालय से गायब है. इसके बाद 24 नवंबर को लिब्रहान आयोग की जांच रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों में पेश हो गई जिसमें अटलबिहारी वाजपेयी एवं भारतीय मिडिया को दोषी माना गया। जबकि नरसिंह राव को क्लीन चिट दी गई। बाबरी मस्जिद विध्वंस केस लालकृष्ण आडवाणी और कुछ अन्य नेताओ के खिलाफ मुकदमा चलाने को लेकर पंरिक्षण याचिका दायर की गई थी जो कि 20 मई 2010 को ख़ारिज कर दी गई।


अयोध्या केस में सुनवाई पूरी हुई 
8 सितंबर 2010 को हाईकोर्ट ने 24 सितंबर को फैसला सुनाने की बात कही, जबकि 28 सितंबर को फैसला टालने की अर्जी हैककोर्ट द्वारा खारिज की गई।

कोर्ट का फैसला : तीन हिस्सों में बाँट दिया गया विवादित 
30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अपना फैसला सुना दिया और विवादित स्थल को तीन हिस्सों में बाँट दिया गया।  एक हिस्सा हिन्दुओं को, दूसरा हिस्सा मुसलमानो को जबकि तीसरा हिस्सा निर्मोही अखाड़े को दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाईं 
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ 14 अपीलें दाखिल हुई। अतः 9 मई 2011 को सुप्रीमकोर्ट ने हाईकोर्ट के इस फैसले पर रोक लगा दी।

21 मार्च 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने लालकृष्ण आडवाणी,मुरली मनोहर जोशी ,उमा भारती सहित कई अन्य बीजेपी एवं आरएसएस के नेताओ के खिलाफ आपराधिक केस चलाने का आदेश दिया।  साथ ही यह भी कहा गया कि अयोध्या में विवादित स्थल के मामले को आपसी सहमति से सुलझाया जाए। लेकिन फिर भी काम नहीं बना।

जब वसीम रिजवी ने कहा - "विवादित स्थल पर राम मंदिर बने"
8 नवंबर 2017 को शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वासिम रिजवी और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मुलाक़ात हुई। इस मुलाक़ात के बाद शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वासिम रिजवी ने बड़ा बयान दिया। रिजवी ने कहा कि -"विवादित स्थल पर राम मंदिर बनना चाहिए और वहा से दूर हटकर मस्जिद बननी चाहिए ". 16 नवंबर 2017 को आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने मामले को सुलझाने की कोशिश की।  उन्होंने सभी पक्षों से अलग अलग मुलाक़ात की लेकिन फिर भी बात नहीं बन पाई।  इसके बाद जब कोर्ट में अगली सुनवाई हुई तब कोर्ट ने 8 फरवरी 2018 तक सभी दस्तावेज पुरे करने की बात कही ताकि इस मामले पर फैसला जल्दी से जल्दी सुनाया जा सके।

नियमित सुनवाई की अपील हुई खारिज 
वरिष्ठ वकील जो कि सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से वकील थे उन्होंने 8 फरवरी को सुन्नी वक्फ बोर्ड की और से पक्ष रखते हुए नियमित सुनवाई करने की अपील की लेकिन उनकी यह अपील खारिज हो गई। साथ ही 29 अक्टूबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जल्द सुनवाई की याचिका ठुकराते हुए केस जनवरी 2019 तक के लिए ताल दिया।

जब अयोध्या में शिवसेना का कार्यक्रम हुआ 
24 नवंबर 2018 को अयोध्या में शिवसेना ने एक कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में हज़ारो हिन्दू कार्यकर्ता एकत्रित हुए। कार्यक्रम में शिवसेना को केंद्र की मोदी सरकार को जमकर कोसा और खरी -खोटी सुनाई।  शिवसेना ने कहा की केंद्र सरकार कुम्भकरण की तरह पिछले 4 साल से सो रही है।  कुम्भकर्ण भी 6-6 महीने सोता था इसी प्रकार केंद्र सरकार भी सोई हुई है. शिवसेना ने कहा कि मैं यहां किसी प्रकार की कोई लड़ाई करने नहीं आया हु मैं तो केंद्र सरकार को जगाने आया हु। जो वादा बीजेपी और मोदी सरकार ने जनता से किया था उसे पूरा करना चाहिए। आइये हम सब मिलकर राम मंदिर का निर्माण करते है। 


विश्वहिंदू परिषद की अगुवाई में अयोध्या में धर्म सभा हुई 

25 नवंबर 2018 को अयोध्या में वीएचपी के नेतृत्व में एक धर्मसभा हिन्दुओ द्वारा आयोजित की गई। धर्मसभा में संत रामभद्राचार्य ने कहा कि पांच राज्यों में चुनावों के कारण तारीख का एलान नहीं हो पा रहा है। अब करो या मारो का समय आ गया है।  देश का बहुसंख्यक समाज अयोध्या में जल्द ही राम मंदिर निर्माण पूरा होते देखना चाहता है।

जब पीएम मोदी ने कहा - फैसला कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद लेंगे
1 जनवरी 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल के प्रथम साक्षात्कार मे संसद में, अध्यादेश लाने के सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अभी यह मामला कोर्ट में है और अपने अंतिम चरण में है।  कोर्ट में इस मामले पर कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जो भी फैसला आता है उसके बाद जो भी सरकार की ज़िम्मेदारी बनती है , सरकार अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाएगी। 8 मार्च 2019 को कोर्ट ने इस मामले पर फैसला न सुनाते हुए मध्यस्थता के छोड़ा और इसके लिए 8 सप्ताह का वक्त दिया कि 8 सप्ताह में यह मामला आपस में सुलझा लिया जाए। लेकिन 8 सप्ताह के बाद भी अगस्त 2019 में मध्यस्थता पैनल यह मामला नहीं सुलझा पाई।

6 अगस्त 2019 से अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुनवाई प्रारम्भ हुई। 16 अक्टूबर 2019 तक सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले पर सुनवाई पूरी हो गई लेकिन कोर्ट ने अपना फैसला न सुनाते हुए फैसले को सुरक्षित रखा। और आखिरकार 9 नवंबर को इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया। यह फैसला राम मंदिर के पक्ष में गया।  कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े की अर्जी खारिज करते हुए विवादित स्थल रामलाल के हक की मानी गई।  जबकि मस्जिद के लिए अयोध्या में ही अलग से 5 एकड़ जमींन देने का आदेश दिया। मस्जिद के लिए जमीं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी उत्तरप्रदेश की योगी सरकार  को सौपी गई. इस फैसले के बारे में और भी रोचक बाते जानने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह जानकारी आजतक से ली गई है 

Nov 9, 2019

November 09, 2019

#AyodhyaVerdict: मंदिर वहीं बनेगा और मस्जिद भी बनेगी, पढ़िए अयोध्या मामले पर फैसले की बड़ी बातें. #RamMandir

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Image Credit: Indianrailinfo

देश के सबसे विवादित और सबसे पुराने केस में से एक अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने 09 अक्टूबर 2019 को आखिरकार अपना फैसला सुना दिया है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में संवैधानिक पीठ ने निर्मोही अखाडा एवं शिया वखव बोर्ड का दावा भी खारिज कर दिया। वहाँ पर भगवन राम का हक़ माना गया है इसके साथ ही मुस्लिम पक्ष को अलग से 5 एकड़ जमीन देने का भी आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को ट्रस्ट बनाने का आदेश भी दिया है.
क्या रही फैसले की बड़ी बातें 
  • अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, मंदिर बनने का रास्ता साफ़ 
  • विवादित ज़मीन पर माना गया भगवान राम का हक़ 
  • आस्था और विश्वास पर नहीं कानून के आधार पर दिया फैसला 
  • मुस्लिम पक्ष को ज़मीन देने की जिम्मेदारी योगी सरकार को दी गई 
  • 3 माह में केंद्र सरकार करेगी मंदिर ट्रस्ट का गठन 


  • राम मंदिर की रूप रेखा तैयार करेगा नया ट्रस्ट 
  • सुन्नी वक्फ को मिलेगी 5 एकड़ वैकल्पिक ज़मीन 
  • निर्मोही अखाड़ा और शिया वक्फ बोर्ड दावा ख़ारिज 
  • पक्षकार गोपाल विशारद को मिला पूजा-पाठ का अधिकार 
  • मुस्लिम पक्ष को ज़मीन  देने की ज़िम्मेदारी योगी सरकार की 
फैसला सुनाते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि दस्तावेजों से पता चलता है कि 1885 से पहले हिन्दू अंदर पूजा करने की बजाय  रामचबूतरा  सीता रसोई में पूजा करते थे. सन 1934 के दंगो के बाद से मुसलमानो का अधिकार आंतरिक अहाते में नहीं रह गया. इसके बाद से ही मुसलमान अपना एकाधिकार सिद्ध नहीं कर पाए जबकि हिन्दू निर्विवाद रूप से बाहर ही पूजा करते रहे. 6 दिसंबर 1992 को मस्जिद का ढांचा ढहा दिया गया जबकि रेलिंग 1886 में लगाईं गई थी.
इस संवैधानिक पीठ ने सुनाया फैसला 
अयोध्या विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने फैसला सुनाया। इस पीठ में सुप्रीम कोर्ट के 4 न्यायाधीश और 1 मुख्य न्यायाधीश शामिल थे. इस संवैधानिक पीठ में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई , जस्टिस अब्दुल नज़ीर ,जस्टिस अशोक भूषण , जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ , एस ए बोबडे शामिल थे।  संवैधानिक पीठ की अध्यक्षता चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने की।  श्री रंजन चाहते थे कि उनके रिटायर होने पहले अयोध्या मामले पर फैसला सुनाया जाए। 
November 09, 2019

#AyodhyaVerdict: सुप्रीम कोर्ट के वे 5 जज जिन्होंने विवादित मामले पर फैसला सुनाया। #RamMandir #SupremeCourt #ChiefJustice

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Image Source: Dainik Bhaskar

अयोध्या फैसला. सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संविधान पीठ ने लम्बे इंतज़ार के बाद विवादित माले पर 09 नवंबर 2019 को आख़िरकार अपना फैला सुना ही दिया। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में 5 जजों की एक बेंच गठित की गई थी इस बेंच में जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस अशोक भूषण , जस्टिस डीवाय चंद्रचूड जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर शामिल थे। इस फैसले के पहले केंद्र सरकार ने सभी 5 जजों की सुरक्षा बढ़ाई।

फैसला आने के पहले केंद्र सरकार ने चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया (CJI) को जेड प्लस सुरक्षा प्रदान की, साथ ही बाकी चारो जजों की सुरक्षा बढ़ाई। सभी 5 जजों के घरों की भी सुरक्षा केंद्र सरकार के द्वारा बढ़ाई गई. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के बाहर भी भरी मात्रा में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए.
फैसले के पहले पांचो जजों ने ४० दिनों तक अयोध्या मामले की सुनवाई की 
आइये हम जानते है पांचो जजों का कार्यानुभव के बारे में।

Supreme Court of India Chief Justice Ranjan Gogoi
CJI Ranjan Gogoi [Image Source : The Hindu]
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई असम के  रहने वाले है और पूर्वोत्तर राज्यों से सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस बनने वाले पहले व्यक्ति है. कानून की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने 1978 में बार में पंजीयन कराया। इसके बाद उन्होंने गुवाहाटी कोर्ट में प्रैक्टिस की और सन 2001 में स्थाई तौर पर जज नियुक्त किए गए।

इसके बाद यह से उनका ट्रांसफर पंजाब - हरियाणा की कोर्ट में हुआ. यहां पर रंजन गोगोई 2001 में चीफ जस्टिस बने. सन 2012 में  इनकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट में बतौर जज हुई और अक्टूबर सन 2018 में  वे सुप्रीम कोर्ट में चीफ बनें।  इन्होने पहले ही कह दिया था कि रिटायर होने के पहले वे अयोध्या मामले में अपना फैसला सुनना चाहते है. और आख़िरकार 9 नवंबर 2019 को उन्होंने अपना फैसला सुनाया.



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Justice S A Nazeer [Image Source: Wikipedia]

जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर 
जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर ने सन 1983 में कर्नाटक की हाई कोर्ट में अपनी वकालात शुरू की 20 साल के लम्बे अनुभव के बाद 2003 में उन्हें कर्नाटक हाईकोर्ट में बतौर एडिशनल जज नियुक्त किया गया. और अगले ही वर्ष यानी सन 2004 में उन्हें स्थायी जज के तौर पर नियुक्त किया गया. अगस्त 2017 में वे सुप्रीम  में बतौर नियुक्त किया गया.

आपको याद होगा कि सन 2017 में जब तीन तलाक का मामला चल रहा था उस समय, तब के चीफ जस्टिस जेएस खेहर के साथ मिलकर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट किसी भी धर्म के निजी कानूनी मामलो मे हस्तक्षेप नहीं कर सकती है. हालांकि बाद में केंद्र सरकार ने यह बिल पास करवाकर तीन तलाक कानून  को बैन कर दिया था.

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Justice Ashok Bhushan [Image Source: Wikipedia]



जस्टिस अशोक भूषण 
सन 1979 में आपने इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकील के तौर पर प्रैक्टिस की शुरुआत की।  22 साल तक लगातार वकालत करने के बाद 2001 में आपको इलाहबाद हाईकोर्ट में जज के तौर पर नियुक्त किया गया. इसके बाद सन 2014 में आपको केरल हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया. यहां पर इन्होने काफी समय तक एक कार्यवाहक चीफ जस्टिस के रूप में भूमिका निभाई। इसके बाद मार्च 2015 में आपको केरल हाईकोर्ट में ही स्थाई जज के तौर पर नियुक्ति दे दी गई. सुप्रीम कोर्ट में इनकी नियुक्ति मई 2016 में की गई.






Justice DY Chandrachud [Image Source: Wikipedia]

जस्टिस डीवाय चंद्रचुड़
जस्टिस दिवाय चंद्रचूड़ मई सन 2016 में सुप्रीम कोर्ट में जज के तौर पर नियुक्त किए गए. इनके पिता  वाईवी चंद्रचूड़ भारत के सबसे लम्बे समय तक चीफ जस्टिस रह चुके है.  डी वाय चंद्रचूड़ का पूरा नाम धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ है. सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति से पहले आप इलाहबाद में चीफ जस्टिस रह चुके है. मार्च 2000 में आप मुंबई हाईकोर्ट में जज के तौर पर नियुक्त किए गए थे. आपने काफी समय तक महाराष्ट्र ज्यूडिशियल अकादमी में निदेशक की भूमिका निभाई। आपने अयोध्या जैसे राष्ट्रस्तरीय विवादित मामले में हिन्दू एवं मुस्लिम दोनों पक्षों की भावनाओं की क़ानूनी पक्ष की बारीकी से जांच की है. आपने देश के कई अहम मामलो में फैसला सुनाया है जैसे - व्यभिचारी और निजता का अधिकार जैसे महत्वपूर्ण मामले आपने बड़े ही सहजता पूर्वक सुलझाए।








Justice SA Bobde [Image Source: News18]


जस्टिस शरद अरविन्द बोबडे
जस्टिस शरद अरविन्द बोबडे का जन्म महाराष्ट्र में हुआ। आपने मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर बैंच में कानून की प्रैक्टिस की. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने सीजेआई पद के लिए जस्टिस शरद अरविन्द का नाम प्रस्तावित किया था. सन 2000 में आपने मुंबई हाईकोर्ट में एडिशनल जज की भूमिका निभाना शुरू की. और इसके 2 वर्ष बाद आपका ट्रांसफर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट  में हो गया. इसके बाद सन 2012 में  मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला। इसके ठीक 1 साल बाद यानी अप्रैल 2013 में आपकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट में हुई। सीजेआई गोगोई के खिलाफ योन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए बनी समिति में भी आप शामिल थे.

पोस्ट आपको कैसी लगी प्रतिक्रिया जरूर दीजियेगा. धन्यवाद 

Nov 6, 2019

November 06, 2019

क्या आप जानते है, LPG ग्राहकों को मिलता है 50 लाख रूपये तक का बीमा, ऐसे करें Claim

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आज देश के अधिकतर घरों में LPG GAS के द्वारा खाना बनाया जा रहा है. किसी के पास Indane GAS Connection है तो किसी के पास Bharat GAS का Connection है. ऐसी कई सारी कंपनियां है जो देश में GAS Connections  Provide करवाती है. लेकिन क्या आप जानते है कि यदि आपके घर में LPG GAS का Connection है तो इसके लिए आपको 50 लाख रूपये तक का मुफ्त बीमा भी मिलता है. लेकिन जानकारी के अभाव में पिछले 25 सालों में किसी ने भी GAS कंपनी में बीमे के लिए Claim नहीं किया है.

इस पोस्ट में आप पढ़ेंगे-
  • LPG GAS Life Insurance क्या होता है ?
  • LPG GAS Life Insurance को क्लेम कैसे करें?
  • GAS Cylinder से गैस लीकेज से कैसे बचें ?
आइये जानते है कौन करता है हमारा बीमा और कैसे हम इसे क्लैम कर सकते है.
[LPG GAS Life Insurance]

LPG Insurance एक दुर्घटना बीमा है और सबसे बड़ी बात हमें इसके लिए कोई अलग से पैसा नहीं देना होता है. ऐसा इसलिए क्यूंकि यह बीमा Public Liability Policy के अंतर्गत आता है. और यही कारण है कि जितनी भी कम्पनियाँ जो कि LPG GAS Provide कराती है वे सभी United Insurance Company Limited में अपने सभी ग्राहकों का Insurance करवाती है.
ईश्वर न करे कभी किसी के यहां LPG GAS Cylinder Blast हो, लेकिन यदि ऐसा होता है Blast के हिसाब से ये कंपनियां हमारा बीमा पास कराती है. LPG GAS Cylinder के ब्लास्ट को भी अलग अलग केटेगरी में रखा गया है और इन अलग अलग ब्लास्ट के हिसाब से ही ये कपनियां हमें बीमे की राशि Provide करवाती है.

एक Report के अनुसार पिछले 25 सालो में किसी ने इस प्रकार के बीमे के लिए क्लेम नहीं किया है. और ऐसा सिर्फ इसलिए क्यूंकि लोगो को इसकी जानकारी ही नहीं है की इस प्रकार का मुफ्त बीमा भी होता है और बीमे की अधिकतम राशि 50 लाख रूपये होती है. यदि LPG GAS Cylinder ब्लास्ट में किसी की मौत हो जाती है तो कंपनी प्रति मृत व्यक्ति 5 लाख रूपये देती है.
इसके अलावा ब्लास्ट में यदि कोई व्यक्ति घायल हो जाता है तो उस व्यक्ति के इलाज़ के लिए अधिकतम 15 लाख रूपये दिए जाते है. जबकि 25 हज़ार रूपये तत्काल दिए जाते है. इसके अलावा ब्लास्ट में यदि किसी की संपत्ति को नुकसान होता है तो संपत्ति के हिसाब से अधिकतम 1 लाख रूपये मिलते है. और यह राशि LPG GAS वितरण कंपनी ही देती है.

अब हम जाते है कि कैसे हम इस बीमे की राशि को क्लैम कर सकते है.
यदि LPG GAS Cylinder से किसी प्रकार की कोई दुर्घटना होती है तो सबसे पहले Local Police को इसकी जानकारी देनी होती है साथ ही Report भी दर्ज करवानी होती है. इसके बाद ,Police Report की एक Copy के साथ-साथ हादसे की जानकारी का एक पत्र हमें GAS Distributor को देना होता है.
GAS Distributor यह सुचना व दस्तावेज GAS Agency पहुंचाता है।  अब GAS Agency एक टीम आपके यहां भेजती है. और यह टीम नुकसान के हिसाब से बीमे की राशि तय करती है. हादसे में यदि किसी की मौत हुई है तो आप मृत व्यक्ति का Death Certificate और Postmortem Report उस टीम को Available करवाएंगे।
हादसे में यदि कोई घायल हुआ है तो आप Medical Bill, Medicine Bill उस टीम को उपलब्ध करवाएंगे।  इसके बाद ही आपका बीमा पास हो पाएगा और बीमा पास होते ही कंपनी आपको, तय की गई राशि उपलब्ध करवाएगी।
GAS Cylinder के हादसों से बचने का उपाय 
हमारी सेफ्टी  हाथों में  होती है, दिन भर की भाग-दौड़ में कभी-कभी ऐसा हो ही जाता है कि घर के किसी भी सदस्य से GAS चालू छूट ही जाता है. हम कितना ही ध्यान रख लें लेकिन कभी न कभी तो ऐसा हो ही जाता है।  ऐसे में हमे जरूरत है कि हम पहले से ही सतर्क हो जाए , क्या पता कौन घर में हमारी गैर मौजूदगी में इस हादसे का शिकार हो जाए।  Market में अब गैस सिलेंडर सेफ्टी डिवाइस मिलना शुरू हो चुके है जो कि 1000 रूपये से भी कम कीमत में हमें मिल जाते है. या फिर आप इन्हे ऑनलाइन भी खरीद सकते है. यह Device आप किसी को Birth Day Gift में भी दे सकते है क्युकी एक तरह से आप उसकी जान की परवाह ही कर रहे है. कई लोग Birth Day Gift के तौर पर इसे देते है.
यह कीमत इतनी ज्यादा भी नहीं है कि हम यह Device ना खरीद सकें।  इसी Value हमें तब पता चलती है जब वाकई में हमें इसकी जरूरत महसूस होती है. घर में बच्चो से भी गैस चालू छूट सकती है ऐसे में GAS Cylinder Safety Device हमारी काफी मदद करता है. यदि आपके किचन में गैस लिक हो रही है तो GAS Cylinder Safety Device ऑटोमेटिक इस लीकेज को बंद कर देता है। यदि आपने चूल्हे पर आग बुझ गई है लेकिन गैस अभी भी चालू है तो यह Device इस व्यर्थ हो रही गैस को रोक देता है.

गैस सेफ्टी डिवाइस खरीदने के लिए यहां क्लिक करें - Buy Now
और इसके अलावा इस डिवाइस में मीटर भी लगा होता है जो यह बताता है कि अभी  सिलेंडर में कितनी गैस भरी हुई है. ऐसे में आप GAS Distributor द्वारा की जा रही गैस चोरी को भी पकड़ सकते है. आपका गैस सिलेंडर खाली होने के पहले ही GAS Cylinder Safety Device आपको बता देगा की सिलेंडर में कितनी गैस और बची हुई है. आप यह डिवाइस एक सिलेंडर से निकालकर दूसरे सिलेंडर पर बड़ी आसानी से लगा सकते है. तो इस प्रकार आप अपने आपको अपने परिवार को गैस सिलेंडर से होने वाले हादसों से बचा सकते है. पोस्ट को अपने सभी मित्रो व रिश्तेदारों के साथ शेयर कीजियेगा।

Nov 5, 2019

November 05, 2019

Xiaomi Mi : दुनिया का पहला 108 मेगा पिक्सेल वाला Smart Phone हुआ Launch

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Image Source: android authority

Xiaomi ने  लम्बे समय से चर्चा में बनें रहने वाले 108 Mega Pixel Camera वाले Phone को आखिरकार Launch कर ही दिया।  और इस Phone का नाम है Mi CC9 Pro. इस Phone की Launching फ़िलहाल चीन में की गई है. और बहुत जल्दी यह Phone हमें India में भी मिल जाएगा. काफी दिनों से लोगो को इस Phone का इंतज़ार था. इस Phone की खासियत यह है की इस Phone में कुल 5 कैमरे दिए गए है, 4 Back Cameras और 1 Front Camera. और Mi CC9 Pro में Camera Quality की बात करें तो यहां हमें 108 Mega Pixel का Camera मिलेगा।
अब हम बात करेंगे Phone के Specifications और Price के बारे में. Xiaomi ने इस Phone को तीन Ram Variant में Launch किया है. आइये जानते है कौन-कौन से है ये Variant.

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Image Source: android authority
  • 6 GB RAM + 128 GB Internal Storage, Price 28,000/- Rs. Only
  • 8 GB RAM + 128 GB Internal Storage, Price 31,000/- Rs. Only
  • 8 GB RAM + 256 GB Internal Storage, Price 35,000 Rs. Only


अब हम बात कर लेते है Mi CC9 Pro Phone के Specifications के बारे में.
इस Phone में Company की ओर से 6.47 इंच का Full HD + AMOLED Display दिया है. जिसका Resolution 2340 X 1080 Pixel है। इसके साथ ही Phone के Top पर Dot Notch मिलेगा।  इसके अलावा बेहतरीन Performance के लिए इसमें Snap Dragon 730 G SOC दिया गया है.
Camera in Mi CC9 Pro
Company ने इस Phone में 5 कैमरे दिए है. जिसमें 108 Mega Pixel का Isocell sensor , 5 Mega Pixel का Teli Photo Lens, 12 Mega Pixel का Depth Sensor, 20 Mega Pixel का एक Ultra Wide Lens और 2 Mega Pixel का Sensor है. इसके अलावा Selfie के लिए 32 Mega Pixel का Front Camera दिया गया है.  


Mi CC9 Pro की Connectivity और Battery
Connectivity के हिसाब से इस Phone में 4G VoLTE, Bluetooth 5.0, WiFi, GPS और USB Type-C Port जैसे Features दिए है. बैटरी की बात की जाए तो इस Phone में 5,260 mAh की बैटरी मिलेगी जो कि 30 वाट की Fast Charging Feature से लेस है.
Customers इस Phone को 11 नवंबर से ऑनलाइन खरीद सकेंगे। और इस Phone के साथ Customers को अलग-अलग Offers भी दिए जाएंगे।  लेकिन Company ने India में Mi CC9 Pro Phone की Launching के बारे में अभी तक कोई News Release नहीं की है.

Nov 2, 2019

November 02, 2019

SMS Send करके आप अपना Aadhar Card Lock / Unlock कर सकते है ताकि कोई गलत इस्तेमाल ना कर सके

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जैसा कि हम जानते है चाहे सिम खरीदना हो या फिर Bank Account Open करवाना हो, लगभग हर काम में अब Aadhar Card की जरूरत होती है. हम हर जगह अपने Aadhar Card की Photocopy दे देते है. और Aadhar Card से हमारी सभी Import जानकारियां भी जुडी रहती है. लेकिन कहीं न कहीं हमारा Data लीक हो जी जाता है. हमारी आधार से जुडी जानकारी किसी न किसी के द्वारा Leak कर ही दी जाती है.  ऐसे में UIDAI यानी Unique Identification Authority Of India ने एक शानदार फीचर जारी किया है. और इस फीचर के जरिये हम अपने Aadhar Card Number को Lock या Unlock भी कर सकते है.
यदि आपको लगता है कि आपके Aadhar Card Number का Miss Use कर रहा है तो आप सिर्फ एक SMS भेजकर अपने Aadhar Card Number को Lock कर सकते है और अपनी जरूरत के हिसाब से Unlock भी कर सकते है. यानी अब Aadhar Card से सम्बन्धित जानकारी लीक होने का किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं रहेगा। इस ख़ास फीचर के द्वारा आप अपने Data को सुरक्षित रख पाएंगे।
इस फीचर को आप एक ताले की तरह Use कर सकते है ताकि कोई बाहरी व्यक्ति आपके Aadhar Card Number को कहीं Use नहीं कर सकें। ऐसे में आधार से जुडी धोखाधड़ी की सम्भावना भी काफी कम हो जाएगी। और हैकर्स भी आपका कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे। यदि वे आपके आधार की जानकारी चाहेंगे तब भी उनको आपके Mobile Verification की जरूरत पड़ेगी। यानी जब तक आप किसी को Permission ही नहीं देंगे तब तक आपका आधार कार्ड कोई Access ही नहीं कर पाएगा।
Aadhar Card Lock करने के लिए आपको अपने Registered Mobile Number से एक SMS Send करना होगा। और Unlock करने के लिए फिर इसी प्रकार से एक और SMS Send करना होगा. तो आइये जानते है क्या है Aadhar Card Lock/Unlock करने की पूरी Process.

कैसे Lock करें Aadhar Card Number:
Aadhar Lock करने के लिए User को अपने Registered Mobile Number से GETOTP लिखकर 1947 पर Send करना होगा. इसके बाद User के पास एक OTP Number आएगा।

OTP मिलने के बाद फिर से अपने Mobile में Type करना है -
LOCKUID <Aadhar Number> <OTP Number> लिखकर फिर से 1947 पर Send कर देना है.

ऐसा करने से आपका Aadhar Card Number Lock हो जाएगा.
कैसे Unlock करें Aadhar Card Number:
Aadhar Card Unlock करने के लिए अपने Registered Mobile Number से Type करें -
GETOTP और इसे 1947 पर Send कर दें. इसके बाद आपको एक OTP प्राप्त होगा. OTP मिलने के बाद Type करें-
Unlock <Aadhar Card Number> <OTP Number> और इसे Send कर दें 1947 पर. ऐसे में आपका Aadhar Card Unlock हो जाएगा।
ऐसा करने पर आप अपने आधार कार्ड की जानकारी को सुरक्षित रख सकते है क्युकी आजकल बहुत ही ज्यादा फ्रॉड होने लगे है. ऐसे में हमें पहले से सतर्क होने की आवश्यकता है. किसी भी प्रकार की अनहोनी का इंतज़ार न करें तो बेहतर होगा।

यह Post अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ जरूर शेयर करें व उन्हें भी जागरूक करें।

Oct 31, 2019

October 31, 2019

विदेश जाकर सिखाएं अंग्रेजी या फिर करें ये आसान से काम, सैलरी के साथ ये कंपनियां देंगी रहने-खाने का खर्च

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विदेश में रहना, घूमना फिरना सभी का सपना होता है, सभी का शौक होता है कि हम विदेश जाए और खूब घूमें फिरें। लेकिन जब विदेश जाने की बात आती है तो हम अपने बैंक बैलेंस के बारे में सोचकर अपने सपनो को वहीं विराम दे देते है. और इस प्रकार हमारा सपना हमेशा के लिए सपना बनकर ही रह जाता है. लेकिन हम आपको इसका Solution बता रहे है. यहां हम आपको ऐसी कुछ Companies का नाम बता रहे है जो लोगो को Jobs provide करती है, उन्हें विदेश भेजती है और रहने-खाने का खर्चा तक देती है. आगे हम आपको English सिखने की कुछ शानदार Books के नाम भी बताएंगे जिनके द्वारा आप अपनी English को Strong कर सकते हो. ये Books आप Online भी खरीद सकते है.
इसके लिए आपको English का अच्छा Knowledge होना चाहिए। जिन कंपनियों के नाम हम आपको बता रहे है वे कंपनियां ऐसे लोगो को Hire करती है जिनको English का अच्छा Knowledge हो और विदेश में जाकर English पढ़ाने के इच्छुक हो. जी हाँ आपने एकदम सही पढ़ा. यदि आपको English Teaching में Interest है तो आप इन कंपनियों से सम्पर्क कर सकते है. ये कंपनियां आपके आने जाने के खर्चे के अलावा वहाँ पर रहने की व्यवस्था भी करती है. सबसे पहले हम बात कर रहे है डिवर्बो कंपनी  के बारे में.  इस कंपनी ने एक व्यक्ति को पुर्तगाल में अंग्रेजी पढ़ाने के लिए भेजा। उस शिक्षक का नाम है एबी एल्जीयर्स है. एबी एल्जीयर्स पेशे से शिक्षक है. कंपनी ने न सिर्फ इनके आने-जाने की व्यवस्था की बल्कि उनके रहने खाने की व्यवस्था भी कंपनी की और से की गई.

डिवर्बो कंपनी ऐसे लोगो को मौका देती है जिन्हें घुमनें-फिरने का ज्यादा शौक होता है. कम्पनी उनका सारा खर्च खुद ही उठाती है. लेकिन शर्त यह है कि आपको English का अच्छा Knowledge होना चाहिए। डिवर्बो कंपनी ने एबी एल्जियर्स के विदेश घुमनें के इस सपने को पूरा किया। उनके घूमने फिरने से लेकर खाने व रहने की भी व्यवस्था की. एबी एल्जियर्स ने जर्मनी, स्पेन और साथ ही पुर्तगाल जाकर लोगो को English Skill सिखाई.
यदि आप वाकई में Basic लेवल से लेकर Advance लेवल की English सीखना चाहते है और अपना Confidence Level बढ़ाना चाहते है तो आपको इन Books को जरूर खरीदना चाहिए। ये Books आप Market  से भी खरीद सकते है और यदि Online खरीदना चाहते है तो भी इन Books के नाम पर Click करके खरीद सकते है.  आपको इन किताबो का नियमित अध्ययन करना है. बस Regularity पर ध्यान रखा है और कुछ ही दिनों में आप अपने आप में एक बहुत ही बड़ा बदलाव देखेंगे. क्युकी ये किताबें खरीद लेना तो बहुत ही आसान है लेकिन इनको रोज बढ़ना थोड़ा मुश्किल काम है. इसलिए यदि आप इन किताबो को रोज पढ़ सके तो ही खरीदें अन्यथा पैसे बिगाड़ने से कोई मतलब नहीं है. आगे हम दूसरी और कंपनियों की बात करेंगे। अब हम दूसरी कंपनी की बात करेंगे और उस Company का नाम है WWOOF यानी World Wide Opportunity on Organic Farm. यह कंपनी भी लोगो को इसी तरह से विदेश भेजती है लेकिन यहां हमें किसी को English नहीं पढानी होती है बल्कि कृषि से सम्बंधित Tips देने होते है. [Agriculture Tips]. यदि आप यह काम कर सकते है तो आपको कंपनी कोस्टा रिका से लेकर कम्बोडिया तक भेज सकती है.
अब हम कुछ और कंपनियों के नाम आपको बताते है जैसे - WorkWay, इसके अलावा Helpx. आपको कुछ ही घंटो तक काम करना होता है  और आप एक अच्छी Life जी सकते है. अपनी ज़िन्दगी को Stylish बना सकते है.

इसके अलावा यदि आपको आइस स्केटिंग और स्नोबोर्डिंग आती है तो भी आप विदेश जा सकते है. माना जाता है कि PGL Company ऐसे लोगो को Hire करती है जिन्हे Ice Skating और Snow Boarding आती है. कंपनी ऐसे लोगो को Hire करके Austria और America जैसी जगहों पर भेजती है. सैलरी के अलावा बाकी का खर्च भी Company ही उठाती है. यदि आप पढ़ाने का शौक रखते है तो इसके लिए आप CHA Educational Tours नाम की कंपनी या फिर Explorica: Educational Tours for Students नाम की Company से भी सम्पर्क कर सकते है. ये कंपनियां आपको विदेश जाकर पढ़ाने का मौका देती है.

यदि आप किसी भी चीज़ की रखवाली करने में माहिर है तो भी आप विदेश जा सजते है. इसके लिए भी कुछ कंपनियां आपको Hire करने के लिए तैयार खड़ी है. Trusted House Sitters और House Carers नाम की बड़ी कंपनियां ऐसे लोगो को Hire कर रही है. साथ ही आपको रहने और खाने के लिए भी इन कंपनियों की और से दिया जाएगा।
इसके अलावा यदि आप पेशे से नर्स है और विदेश जाने की इच्छा रखते है तो फिर समझ लीजिये आपका सपना पूरा करने के लिए भी कुछ कंपनियां तैयार खड़ी है. आपको बस इन कंपनियों से संपर्क करना है. आपको अपना बैंक बेलेन्स देखने की बिलकुल भी जरूरत नहीं है. ऐसे में आप TravelNursing.Org नाम की कंपनी से तुरंत सम्पर्क करें। यह कंपनी आपको विदेश में रहने के अलावा घूमने-फिरने की सुविधा भी उपलब्ध कराती है.


Post पसंद आई हो तो अपने दोस्तों एवं रिश्तेदारों के साथ इस Post को जरूर Share कीजिएगा। Thank You.

Oct 30, 2019

October 30, 2019

आपके बच्चे को इंटरनेट की लत है या नहीं, ऐसे करें पहचान

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Internet का Use करना और Internet की लत लग जाना दोनों अगल-अलग बातें है. आज हम देखते है कि छोटे-छोटे बच्चे अभी से Internet के आदि हो रहे है और रात-दिन Mobile या Internet से चिपके रहते है. इस बात को ध्यान में रखते हुए बाल अधिकार संरक्षण  आयोग ने इस विषय पर गहरी चिंता जाहिर करते हुए इस चीज़ के लिए एक Program Organize किया। यहाँ पर इस Program में बड़े-बड़े विशेषज्ञों के द्वारा जो बातें बताई गई वह वाकई में सभी माता-पिता को जाननी चाहिए।
इस Post को पढ़ने के बाद आपको आपके काफी सारे प्रश्नो के उत्तर खुद-ब-खुद मिल जाएंगे। साथ ही यह भी जान पाएंगे कि बच्चों या बड़ों को यदि Internet या Mobile की लत लग जाती है तो भविष्य में उन्हें क्या-क्या दिक्क्तें हो सकती है. तो यहां पर इस Article में उन्ही बातों को Discuss करने जा रहे है जो बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा उस कार्यशाला में शिक्षकों को बताई गई।



जिन बच्चों में Internet या Mobile की लत लगी होती है उन बच्चों में कुछ अलग ही लक्षण पाए जाते है. आइये जानते है कौन से है अलग लक्षण -
  • आँखों में सूजन 
  • नींद न आना 
  • बैचेनी 
  • Depression
  • थोड़ी-थोड़ी देर में Mood Change होना 
  • सिर दर्द 
  • कंधे या पीठ दर्द होना 
  • हर काम से जल्दी बोर हो जाना 
  • हर काम में तालम-टोल करना आदि
आजकल बच्चों में Mobile, internet और Video Games की लत तेज़ी से बढ़ रही है जिसके बहुत ही भयावह परिणाम हो सकते है. Actually Internet का Use करते हुए और Video Games खेलते हुए बच्चों के Mind में Dopamine का level बढ़ जाता है. इससे उनके अंदर Satisfaction की भावना का एहसास होता है. और यही कारण है कि उनके मन में लत का स्तर लगातार बढ़ते रहता है.

DCPR (Delhi Commission for Protection of Child Rights) बाल अधिकार संरक्षण आयोग की एक सदस्य रंजना प्रसाद ने बताया कि बच्चों में Mobile, Internet, Video Gaming की यह लत बहुत ही चिंतनीय है। क्यूंकि यह लत बच्चों के मानसिक स्वस्थ्य के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव डाल रही है.
उन्होंने बताया कि भविय में भी हम इस प्रकार की कार्यशाला आयोजित करते रहेंगे ताकि अभिभावक एवं शिक्षक अपने बच्चों को यह लत लगने से दूर रख सकें।

यहाँ पर हमारे द्वारा आपके लिए Mobile Addiction (लत) को दूर करने के लिए कुछ Tips दी जा रही है जो छोटे बच्चो से लेकर बड़ों को भी Follow करने चाहिए। इन Tips को Daily Routine में लाने से आपको इसके काफी सरे फायदे भी नज़र आएंगे।
जेब बदलें:
कई बार क्या होता है हम बिना काम से किसी न किसी जेब में थोड़-थोड़ी देर में हाथ डालते है  और ऐसे में हमारे जेब में जो कुछ भी होता है उसे बार-बार हाथ में ले लेते है. ऐसे में हमें क्या करना चाहिए कि अपने Mobile को ऐसी Pocket में रखें जहां हम बार-बार हाथ नहीं डालते हो. ऐसे में धीरे-धीरे हमारी आदत हो जाएगी और हम अपने Mobile को बार-बार हाथ में लेने से बचेंगे।

Data और Notification Off रखें:
अक्सर अपना Mobile Use करते-करते हम अपना Mobile Data On ही छोड़ देते है. ऐसे में हर थोड़ी-थोड़ी में Mobile में Notifications  की आवाज़ आती है और हम तुरंत अपना Mobile फिर से हाथ में ले -लेते है. ऐसे में हमें दो तरफ से नुकसान हो रहे है.

एक तो, हमारा ध्यान बार-बार भटक रहा है और Mobile की और ध्यान जा रहा है ऐसे में हम अपने Mobile को फिर से अपने हाथ में ले-लेते है.
दूसरा, Mobile Data हमेशा On रहने से Mobile Battery जल्दी Discharge हो जाती है. और ऐसी प्रकार से Mobile Battery की Life भी कम होती जाती है.

दूसरा कोई भी काम करते हुए Mobile का Use न करें:
हमेशा ध्यान रखें कि जब भी हम कोई दूसरा काम कर रहे होते है जैसे- खाना खाना, टीवी देखना, पढ़ाई करना, Office Work करना या फिर वो कोई भी काम हो सकता है, ऐसे में कभी भी हमें अपने Mobile का Use नहीं करना चाहिए। क्यूंकि ऐसे में हमें हर काम के साथ Mobile Use करने की आदत हो जाती है. और फिर हम कोई भी काम ठीक से नहीं कर पाएंगे और जब काम ही ठीक से नहीं होगा तो उस काम के परिणाम भी ठीक नहीं आएँगे।
बिस्तर में Mobile का Use कभी न करें:
हममे से 95% लोग अपने फ़ोन को बिस्तर पर लेजाते है और इसका Use अधिकतर Night में किया जाता है. और सवेरे भी बिना Mobile Check किये हमारी सुबह नहीं होती है. Night में हमारे Room में तो अँधेरा होता है लेकिन Mobile की खतरनाक रौशनी / किरणे हमारी आँखों में सीधे जाती है. शुरुआत में तो हमें ऐसी कोई दिक्कत पता नहीं चलती है लेकिन बाद में एकदम से हमारी आँखें कमजोर हो जाती है और आँखो में दर्द रहने लगता है , आँखों से पानी आने लगता है, जलन रही है और साथ ही सिर दर्द भी रहने लगता है. इसके अलावा गार्डन में दर्द पीठ दर्द ये सभी बीमारिया जल्दी ही हमारे शरीर को जकड़ लेती है.
यहां पर इस Post में हम आपको यह नहीं कह रहे है की हमें Smart Phone का Use ही नहीं करना चाहिए बल्कि हम यह कह रहे है कि Smart Phone को Use करने में यदि थोड़ी सावधानी बरती जाए तो हम इसकी लत से बच सकते है साथ ही शरीर और दिमाग की कई सारी बीमारियों से भी हम बच सकते है.

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