एक महान पुरुष श्री अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन से जुडी कुछ ख़ास बातें। Former PM Shri Atal Bihari Vajpayee Biography.

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हार नहीं मानूंगा, रार नई ठानूंगा 
काल के कपाल पर लिखता-मिटाता हूँ 
गीत नया गाता हूँ, गीत नया गाता हूँ। 
इसी तरह की कई सारी कविताओं से लोगो के दिलो पर राज करने वाले भारत के पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी अब हमारे बीच नहीं रहे। लम्बे समय से बीमार चल रहे श्री अटल जी को 11 जून 2018 को एम्स में भर्ती किया गया था.लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर तबियत कुछ ज्यादा बिगड़ जाने से अब वे हमारे बीच नहीं रहे. 16 अगस्त 2018 को अटल बिहारी वाजपेयी जी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
 श्री अटल जी एक ऐसे व्यक्तित्व के धनी थे जिनके विरोधी भी, उनका सहृदय सम्मान करते है. राजनीती में अपनी मेहनत, लग्न और दृढ़ निश्चय से उन्होंने दुनिया में अपनी एक अलग ही पहचान बनाई। अपने सटीक शब्दों के द्वारा लोगो तक अपने विचारो को पहुंचाने की इस अद्भुत कला ने ही उनको राजनीती में एक अलग पहचान दिलाई।

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 वैसे तो इस महान शख्सियत की महान जीवनगाथा को कुछ ही शब्दों में समेत पाना बेहद ही मुश्किल है। लेकिन फिर भी इस पोस्ट के माध्यम से हम, हम सबके आदर्श श्री अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन की कुछ मुख्य कड़िया जानने की कोशिश करते है. अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्यप्रदेश के ग्वालियर में एक ब्राहम्मण परिवार में हुआ। उनके पिता का नाम श्री कृष्ण बिहारी वाजपेयी था, व उनकी माता का नाम  श्रीमती कृष्णदेवी था। उनके पिता पेशे से एक अध्यापक के साथ-साथ एक प्रसिद्द कवि भी थे. 
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अपने पिता  की कविताओं से प्रेरित होकर ही अटल जी में भी एक कवि की भांति कविताएँ लिखने की भावना जागृत हुई। अटल जी की शुरूआती पढ़ाई सरस्वती शिशु मंदिर, व गोरखी बाड़ा ग्वालियर में हुई। Graduation की पढाई के लिए उन्होंने महारानी लक्ष्मीबाई कॉलेज में Admission लिया और इसके बाद DAV College Kanpur से उन्होंने Master Of Arts (MA) में अपना Post Graduation किया। अटल जी को शुरू से ही राजनीती में काफी रूचि थी. इसीलिए जब वे 15 वर्ष के थे तब उन्होंने RSS (राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ) Join कर लिया। 1942 में भारत छोडो आंदोलन में उनको गिरफ्तार भी किया गया और इसी के चलते 23 दिन उनको जेल में रहना पड़ा। 
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ऐसा माना जाता है की सन 1944 से अटल जी का राजनीती में एक सक्रिय नेता के तौर पर आगमन हुआ. जब उन्हें ग्वालियर के एक आर्य समाज मंदिर समिति ने उन्हें अपना महासचिव घोषित किया। हालांकि RSS के साथ तो अटल जी पहले से ही जुड़े हुए थे. इस समय अटल जी की उम्र 20 वर्ष हो चुकी थी. और यही वह समय था जब अटल जी ने यह निश्चय किया कि देश की सेवा के लिए वे कभी भी शादी नहीं करेंगे। आगे चलकर 1947 में जब हमारा देश आज़ाद हुआ था, तब अटल जी RSS के एक Full Time  प्रचारक बन चुके थे. इसी वर्ष उन्हें RSS का विस्तारक बनाकर उत्तर प्रदेश भेज दिया गया. यहाँ रहते वे देश के कई समाचार पत्रों के लिए लिखने भी लगे थे जिससे उनका कद धीरे-धीरे और बढ़ने लगा. अटल जी सभी की नज़रों में एक उभरते हुए सितारे की तरह चमकने लगे थे.

सन 1957 में श्री अटल जी ने भारतीय जन संघ पार्टी में रहते हुए मथुरा
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और बलरामपुर 2 जगहों से चुनाव लड़े. मथुरा से तो वे चुनाव नहीं जीत सके लेकिन बलरामपुर से उन्होंने जीत हासिल की. अटल जी के भाषणों में शब्दों का सटीक चयन को देखते हुए उस वक्त के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू भी उनके कायल हो गए. नेहरू जी ने उनके भाषणों को सुनकर कहा था की - "अटल जी एक दिन जरूर भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।" इधर 1968 में दीन दयाल उपाध्याय के निधन के पश्चात, अटल जी भारतीय जनसंघ पार्टी के मुखिया चुन लिए गए थे. और अब इस पार्टी को आगे ले जाने की बागडोर अटल के कंधो पर आ गई। 


सन 1975 से सन 1977 तक आपातकाल के दौरान देश के कई नेताओ को गिरफ्तार किया गया जिसमे अटल बिहारी वाजपेयी भी थे. 1977 में आपातकाल के दौरान जब चुनाव कराए गए तब जनता दल पार्टी द्वारा सरकार बनाई गई।  इस पार्टी की तरफ से श्री मोरार जी देसाई को प्रधानमंत्री बनाया गया और विदेश मंत्री के तौर पर अटल जी को जिम्मेदारी सौपी गई। भारतीय विदेश मंत्री के तौर पर अटल बिहारी वाजपेयी एक मात्र ऐसे व्यक्ति जिन्होंने सन 1977 में  United Nations General Assembly (संयुक्त राष्ट्र महासभा) में हिंदी में भाषण  दिया था।  इससे पहले ऐसा किसी भी नेता द्वारा नहीं किया गया.
लेकिन जनता दल द्वारा बनाई गई सरकार ज्यादा आगे तक नहीं जा पाई
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और सन 1979 में जनता दल द्वारा बनाई गई सरकार गिर गई. इसके बाद सन 1980 में अटल जी ने अपने श्री लालकृष्ण आडवाणी और भेरौ सिंह शेखावत के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की और पार्टी के प्रथम अध्यक्ष के तौर पर अटल जी को ही चुना गया. पार्टी द्वारा ज्यादा से ज्यादा लोगो को अपने साथ जोड़े जाने का प्रयास किया गया. लेकिन जब सन 1984 में चुनाव हुवे तब भारतीय जनता पार्टी को मात्र 2 सीटों ही विजयी प्राप्त हुई. लेकिन इससे अटल  जी को ज्यादा कोई फर्क नहीं पड़ा उन्होंने बिलकुल भी हार नहीं मानी और उन्होंने अपने काम पर ध्यान दिया। वे पार्टी को और गर्म जोशी से मज़बूत करने में लगे रहे.

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सन 1996 में जब देश में चुनाव हुए तब भारतीय जनता पार्टी या यूँ कहें की अटल जी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और 16 मई 1996 को अटल बिहारी वाजपेयी जी पहली बार भारत के प्रधानमंत्री बने। लेकिन यह गठबंधन वाली सरकार ज्यादा आगे तक नहीं बढ़ पाए और सिर्फ 13 दिनों के कार्यकाल के बाद अटल जी ने इस्तीफा देकर सरकार गिरा दी. 1998 में देश में एक बार फिर चुनाव हुए और फिर BJP ने NDA के साथ मिलकर सरकार बनाई। चूँकि गठबंधन की सरकार होने के कारण यह सरकार भी अपने मिशन को ज्यादा आगे तक नहीं खींच पाए और मात्र 13  महीनो में ही यह सरकार भी गिर गई. इसी कार्यकाल के दौरान अटल सरकार द्वारा पोखरण में न्यूक्लियर टेस्ट करने के आदेश दिए गए थे. 

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1998 में सरकार गिरने के कुछ समय पश्चात पुनः चुनाव कराए गए. और इस बार BJP की Leadership वाले NDA गठबंधन को 303 सीटें मिली और एक बार फिर यानी तीसरी बार 13 October 1999 को अटल जी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इस बार उन्होंने अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा किया। अटल बिहारी वाजपेयी जी ने सत्ता में रहते व सत्ता के बाहर रहते कई सारे कल्याणकारी कार्य किये। इस कारण वे सभी के दिलो में बसते थे. अटल जी के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था में काफी मज़बूती आई.

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जब 2004 में देश में चुनाव हुए तब BJP सरकार नहीं बना पाई. हालांकि अपनी उम्र को देखते हुए उन्होंने राजनीती से संन्यास लेने की योजना बनाई। आज दूसरी राजनैतिक पार्टियों के लोग या यूँ कहें की उनके विरोधी भी, उनके द्वारा किये गए जन कल्याणकारी कार्यो की सराहना करते हुए उन्हें याद करते है. उनके द्वारा देश हित में किये गए कार्यो के लिए उनको 2015 में भारत रत्न से भी नवाज़ा जा चूका है. आज भले ही श्री अटल जी हमारे बीच न रहे हों लेकिन वे हमारे दिलो में हमेशा जीवित रहेंगे। उनके जीवन की गाथा, उनकी देश भक्ति व देश के प्रति सोंच आज हम उनके द्वारा लिखी गई कई सारी कविताओं में पढ़ सकते है. महान व्यक्तित्व के धनि स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को भावभीनी श्रद्धांजलि। 
जय हिन्द।


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